
शिवगंज/सुमेरपुर। उदयपुर की कोटड़ा तहसील की बेकरिया ग्राम पंचायत के तेजा का वास में वर्ष 1970 से 1978 के मध्य बने सई बांध से ओवरफ्लो होकर व्यर्थ बहकर गुजरात जा रहे पानी को जवाई बांध में परिवर्तित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर सुस्त गति को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने गहरी नाराजगी जताई है। रविवार को लोढ़ा ने सुमेरपुर के पूर्व प्रधान एवं कांग्रेस प्रत्याशी रहे हरिशंकर मेवाड़ा के साथ सई बांध का दौरा कर योजना पर हो रहे कार्य का अवलोकन किया और सरकार पर कार्य को लेकर उदासीनता का आरोप लगाया।
लोढ़ा ने बताया कि वर्ष 2015 से 2020 के बीच सई बांध से करीब 3000 एमसीएफटी पानी व्यर्थ बहकर गुजरात चला गया। इस नुकसान को रोकने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष 2020 में करीब 100 करोड़ की योजना स्वीकृत की थी। इस योजना के अंतर्गत सई बांध की पौने तीन मीटर गहरी सुरंग को 4 मीटर तक गहरा करना था ताकि व्यर्थ जा रहे पानी को जवाई बांध में लाया जा सके। इसके पूरा होने पर जवाई बांध में पहुंचने वाले पानी की मात्रा 34 एमसीएफटी से बढ़कर 75 एमसीएफटी तक होनी थी।
उन्होंने खेद जताया कि यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट 15 सितंबर 2024 तक पूर्ण होना चाहिए था, लेकिन अब तक महज 60 फीसदी कार्य ही पूरा हो पाया है। लोढ़ा ने कहा कि यदि समय पर कार्य होता तो इस वर्ष जवाई व सई बांध में भरपूर पानी का अधिकतम उपयोग किया जा सकता था। वर्तमान स्थिति में यह संभावना है कि कार्य 2026 से पहले पूर्ण नहीं होगा।
लोढ़ा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आग्रह किया कि वे प्रशासन और ठेकेदार को चुस्त-दुरुस्त कर इस कार्य को गति दिलाएं ताकि क्षेत्र के लोगों को समय पर इस योजना का लाभ मिल सके। इस अवसर पर सहायक अभियंता (सिंचाई) आकांक्षा भी मौजूद रहीं और उन्होंने कार्य की प्रगति के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

यह थी सई बांध की योजना
उदयपुर जिले की कोटड़ा तहसील में बना सई बांध जो कि जवाई बांध का फीडर बांध है। जिससे पेयजल व सिंचाई की आवश्यकताएं पूरी होती हैं। इस बांध की मूल लंबाई 951.20 मीटर व ऊंचाई 8.25 मीटर और सकल क्षमता 1106.58 एमसीएफटी थी। जिसे 2006-08 में बढ़ाकर ऊंचाई 10.93 मीटर व क्षमता 1618.47 एमसीएफटी कर दी गई। बांध का जलग्रहण क्षेत्र 331.52 वर्ग किमी है। यहां से हर वर्ष पानी जुलाई से जनवरी माह के बीच 6.776 किमी लंबी सुरंग के माध्यम से जवाई बांध तक पहुँचाया जाता है। सुरंग की मौजूदा क्षमता 305 क्यूसेक है, जिसे बढ़ाकर 855 क्यूसेक करने के लिए राज्य सरकार ने 28 अक्टूबर 2020 को 8658.30 लाख की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी। इस कार्य के 15 सितंबर 2024 तक पूर्ण होना था। लेकिन अभी तक 60 फीसदी कार्य ही हो सका हैं।
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