
बीकानेर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है खाजूवाला के थाना प्रभारी (SHO) सुरेंद्र कुमार प्रजापत पर एक होटल संचालक से ₹1 लाख की रिश्वत (जिसे स्थानीय भाषा में ‘बंधी’ कहते हैं) मांगने, धमकाने और जबरन सीसीटीवी फुटेज का डीवीआर (DVR) जब्त करने का आरोप लगा है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एफआईआर थानेदार के खिलाफ उसी थाने में दर्ज हुई है, जहां वह खुद इंचार्ज थे
चक 25 बीडी निवासी राजेंद्र सिंह पुत्र हरीसिंह ने खाजूवाला के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACM JM) के समक्ष एक इस्तगासा (न्यायिक शिकायत) दायर किया. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, तत्काल पुलिस को थानेदार समेत 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया. कोर्ट के इस सख्त रुख ने सुनिश्चित किया कि पुलिसकर्मी अपने ही साथी पर लगे गंभीर आरोपों को दबा न सकें

FIR में खाजूवाला थाना प्रभारी सुरेंद्र कुमार प्रजापत को मुख्य आरोपी बनाया गया है. उनके साथ 5 अन्य पुलिसकर्मी भी नामजद हैं, जिनमें एक हेड कांस्टेबल ईश्वर सिंह और चार कांस्टेबल – रामकुमार, मुकेश, रामनिवास, और मोनू सिंह शामिल हैं. पुलिसकर्मियों के अलावा, एक स्थानीय निवासी प्रेम शर्मा का नाम भी आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया है. इन सभी पर धमकी, जबरन वसूली (Extortion) और नाजायज तरीके से परेशान करने के गंभीर आरोप हैं
होटल चलाने वाले पीड़ित राजेंद्र सिंह ने अपनी शिकायत में घटना का विस्तृत ब्यौरा दिया है. उन्होंने बताया, ‘1 जुलाई 2025 को सुबह करीब 7:15 बजे, थानेदार सुरेंद्र प्रजापत और अन्य पुलिसकर्मी पुलिस की गाड़ी में उनके होटल पहुंचे. थानेदार ने उसे सीधे धमकाया और कहा कि तू थाने नहीं आ रहा है, ना ही तू थाने की बन्धी पहुंचा रहा है
जब राजेंद्र सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ पुराने सभी केस झूठे हैं और उन्हें बेवजह परेशान किया जा रहा है, तो पुलिसकर्मी भड़क गए. आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने धमकी देते हुए यहां तक कहा कि यह ‘बंधी’ तो उच्चाधिकारियों को पहुंचानी पड़ती है. इस धमकी के तुरंत बाद, पुलिस टीम ने घटना का साक्ष्य मिटाने के लिए होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर (DVR) जबरन जब्त कर लिया
पीड़ित ने आगे बताया कि डीवीआर जब्त करने के बाद, साथ आए एक पुलिसकर्मी ने मामला शांत करने के लिए ₹1 लाख की रिश्वत की मांग की. डरकर, राजेंद्र सिंह ने अपने भाई से ₹1 लाख मंगवाए और यह राशि एक दुकान पर पहुंचा दी. सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि रुपये देने के बावजूद भी पुलिसकर्मियों ने अपना वादा नहीं निभाया. राजेंद्र सिंह के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया और उनका डीवीआर भी वापस नहीं किया गया
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