
नवजोत कौर ने कहा शनिवार (06 दिसंबर) को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा था, ”सक्रिय राजनीति में नवजोत सिंह सिद्धू तभी लौटेंगे जब कांग्रेस उन्हें पंजाब में पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करेगी. उनके पास किसी पार्टी को देने के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन वे पंजाब को एक ‘सुनहरा राज्य’ बना सकते हैं लेकिन हमारे पास 500 करोड़ रुपए नहीं हैं, जो हम मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लिए दे सकें, जो 500 करोड़ रुपए का सूटकेस देता है, वही मुख्यमंत्री बनता है
नवजोत कौर सिद्धू ने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर 500 करोड़ रुपये का जिक्र करते हुए टिप्पणी की थी. इसके बाद पूरे प्रदेश में सियासत तेज हो गई. कांग्रेस ने सोमवार (08 दिसंबर) को उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया. पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने नवजोत कौर के खिलाफ एक्शन लिया. वडिंग ने एक आदेश में कहा, ”डॉ. नवजोत कौर सिद्धू को तत्काल प्रभाव से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जाता है
नवजोत कौर सिद्धू ने अपने बयान पर दी सफाई
पंजाब में राजनीतिक विवाद बढ़ने के बाद नवजोत कौर सिद्धू ने अपनी टिप्पणी को लेकर सफाई भी पेश की. उन्होंने बयान को तोड़ मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”मैं हैरान हूं कि मेरे सीधे बयान को किस तरह तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. मैंने सिर्फ इतना कहा था कि कांग्रेस पार्टी ने हमसे कभी कुछ नहीं मांगा. जब मुझसे पूछा गया कि नवजोत किसी दूसरी पार्टी से CM पद का चेहरा बन सकते हैं या नहीं, तो मैंने कहा कि हमारे पास मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी को देने के लिए पैसा नहीं है
बीजेपी, AAP ने कांग्रेस को घेरा
नवजोत कौर सिद्धू के बयान के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई. आम आदमी पार्टी के साथ बीजेपी ने भी कांग्रेस को घेरा. आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने तंज कसते हुए कहा था नवजोत कौर के बयान से साफ जाहिर है कि कांग्रेस देश की सबसे भ्रष्ट पार्टी है. जिस पार्टी में जीतने की बात तो दूर, उम्मीदवार बनने के लिए भी कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये देने पड़ते हों, तो कोई समझ सकता है कि उस पार्टी का क्या हाल होगा.
बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि कई राज्यों में ऐसे मामले सामने आए, जहां कांग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी के अंदरूनी भ्रष्टाचार और पैसे की ताकत को लेकर चिंता जाहिर की. किसी भी लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता बेहद जरूरी है
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