
बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में वापसी का ऐलान करने वाले पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के ठिकानों पर एसीबी की कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है मंगलवार (13 जनवरी) को जयपुर से आई एसीबी की टीम ने बांसवाड़ा जिले में मालवीया से जुड़े तीन ठिकानों पर जांच कार्रवाई की. टीम ने कलिंजरा स्थित भैरवजी कृपा फिलिंग स्टेशन, बागीदौरा स्थित भैरवजी फिलिंग स्टेशन और बागीदौरा क्षेत्र में स्थित एक क्रशर प्लांट पर पहुंचकर दस्तावेजों की गहन जांच-पड़ताल की. दोनों पेट्रोल पंप स्वयं महेंद्रजीत सिंह मालवीया के नाम दर्ज हैं, जबकि क्रशर प्लांट उनके पुत्र के नाम बताया जा रहा है

जानकारी के अनुसार एसीबी की टीम मंगलवार सुबह करीब 9 बजे जयपुर पासिंग कार से बागीदौरा स्थित पेट्रोल पंप पहुंची. उस समय पंप का मैनेजर मौजूद नहीं था, जिस पर टीम ने लगभग एक घंटे तक इंतजार किया. मैनेजर के पहुंचने के बाद जमीन, पेट्रोल पंप संचालन और लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई. इसके बाद टीम क्रशर प्लांट पहुंची, जहां जमीन के कागजात और आर्थिक लेन-देन से संबंधित जानकारी ली गई. दोपहर करीब 1 बजे टीम पुनः पेट्रोल पंप पर लौटी और अतिरिक्त पूछताछ की. इसके बाद कलिंजरा स्थित पेट्रोल पंप पर भी इसी तरह की जांच की गई. दोनों ही स्थानों पर टीम करीब आधा-आधा घंटे तक रुकी

छापेमारी में क्या मिला- मालवीया
एसीबी की जांच के तुरंत बाद मालवीया ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार उन्हें दबाव में लेने की कोशिश कर रही है, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त विधायकों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है. भाजपा सरकार मुझ पर दबाव बनाने की कोशिश कर रही है और बीएपी के भ्रष्ट विधायकों को संरक्षण दे रही है
बीजेपी छोड़ते ही एसीबी का छापा क्यों
एसीबी की इस कार्रवाई की टाइमिंग को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. दरअसल, मालवीया ने रविवार को जयपुर में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में वापसी का ऐलान किया था. उन्होंने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को पत्र सौंपकर पार्टी में पुनः शामिल होने की इच्छा जताई थी. इसके ठीक 48 घंटे के भीतर एसीबी की टीम उनके बांसवाड़ा स्थित ठिकानों पर पहुंच गई.
मालवीया ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चार गाड़ियां भेजकर जांच करवाई गई है तो सरकार यह स्पष्ट करें कि जांच में आखिर मिला क्या. उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक बदले और दबाव की रणनीति का हिस्सा है, ताकि पंचायत राज चुनावों से पहले उन्हें कमजोर किया जा सके
Latest News
Categories
- Uncategorized (13)
- अनूपगढ़ (1)
- अम्बाला (1)
- अयोध्या (5)
- अरुणाचल प्रदेश (1)
- अलवर (9)
- असम (5)
- अहमदाबाद (7)
- आंध्र प्रदेश (3)
- इंडिया (426)
- इतिहास (55)
- इंदौर (13)
- उत्तरप्रदेश (37)
- उत्तराखंड (24)
- उदयपुर (19)
- ऐस्ट्रो (27)
- ऑटो (4)
- करियर (11)
- करौली (1)
- कर्नाटक (7)
- कुरुक्षेत्र (2)
- कोटपूतली-बहरोड़ (5)
- कोटा (18)
- क्राइम (22)
- खेल (41)
- खैरथल–तिजारा (2)
- गाज़ियाबाद (3)
- गांधीनगर (1)
- गुजरात (11)
- ग्वालियर (1)
- चित्तौड़गढ़ (5)
- चुनाव (51)
- चुरू (6)
- छत्तीसगढ़ (4)
- जबलपुर (1)
- जम्मू कश्मीर (8)
- जयपुर (436)
- जयपुर ग्रामीण (19)
- जवाई प्रेस क्लब (1)
- जालोर (6)
- जेसलमेर (25)
- जोधपुर (97)
- जोधपुर ग्रामीण (16)
- झारखंड (1)
- झालावाड़ (18)
- झुंझुनू (5)
- टेक्नोलॉजी (13)
- टोंक (2)
- डीडवाना कुचामन (3)
- डूंगरपुर (7)
- दिल्ली (47)
- दिल्ली एनसीआर (11)
- देवास (1)
- दौसा (3)
- धौलपुर (2)
- नीम का थाना (1)
- न्यूज़ (696)
- पंजाब (6)
- पश्चिम बंगाल (14)
- पानीपत (3)
- पाली (192)
- प्रयागराज (3)
- फरीदाबाद (4)
- फलौदी (4)
- बाड़मेर (21)
- बारां (9)
- बालोतरा (10)
- बांसवाड़ा (4)
- बिजनेस (73)
- बिहार (43)
- बीकानेर (12)
- बूंदी (3)
- ब्यावर (1)
- भरतपुर (4)
- भीलवाडा (3)
- भोपाल (16)
- मथुरा (2)
- मध्यप्रदेश (35)
- मनोरंजन (70)
- महाराष्ट्र (31)
- मेरठ (1)
- राजसमंद (1)
- राजस्थान (928)
- राज्य (268)
- लखनऊ (9)
- लाइफस्टाइल (9)
- वाराणसी (2)
- विश्व (101)
- शिक्षा (5)
- श्री गंगानगर (7)
- सवाई माधोपुर (3)
- सांचोर (1)
- सिरोही (26)
- सीकर (10)
- सूरत (1)
- हरियाणा (16)
- हेल्थ (10)

