
कांग्रेस के पंचायतीराज सशक्तिकरण सम्मेलन में राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि भाई, बेटा, रिश्तेदार की राजनीति अब नहीं चलेगी. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सुखजिंदर सिंह रंधावा मंत्री बने, सांसद बने और उसका बेटा जिला अध्यक्ष और जिला परिषद का पद संभाले तो यह गलत है और इसी सोच ने कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन और परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 1997 में उनके पिता ने उन्हें टिकट दिलवाया, लेकिन उसके बाद उनके पिता राजनीति से पीछे हट गए
देश को बचाने के लिए आंदोलन की जरूरत’
रंधावा ने कहा कि आज भाजपा केवल इतिहास को तोड़ मरोड़कर पेश कर रही है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के परिवारों ने देश की आजादी की लड़ाई लड़ी है जबकि भाजपा का ऐसा कोई इतिहास नहीं है. उन्होंने कहा कि आज देश को जिस दिशा में ले जाया जा रहा है वह ईस्ट इंडिया कंपनी के दौर जैसी स्थिति बना रही है और अब एक बार फिर देश को बचाने के लिए आंदोलन की जरूरत है. मनरेगा और केंद्र सरकार की योजनाओं पर रंधावा ने कहा कि कोई भी राज्य सरकार चालीस प्रतिशत हिस्सेदारी वहन करने की स्थिति में नहीं है.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पहले योजनाओं का अनुपात बदला और फिर उन्हें धीरे धीरे खत्म कर दिया. उन्होंने बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना को पहले कमजोर किया गया और फिर पूरी तरह बंद कर दिया गया. भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए रंधावा ने कहा कि आज राज्य में इंजन वाली सरकार नहीं बल्कि बिना इंजन की सरकार चल रही है
उन्होंने कहा कि सिर्फ पर्चियों के सहारे सरकार चलाई जा रही है लेकिन नकल मारने की कला इन्हें नहीं आती. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तब ही बचेगी जब नेताओं के दिल में खोट नहीं होगा और संगठन एकजुट होकर ललकार देगा. रंधावा ने कहा कि अगर कांग्रेस पूरे दमखम के साथ पंचायत स्तर तक लड़ेगी तो भाजपा कहीं दिखाई नहीं देगी. उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि पंचायतीराज को ही बदलाव का केंद्र बनाएं, क्योंकि यही व्यवस्था दोबारा देश को सही दिशा में ले जा सकती है
पंचायती राज के इतिहास पर क्या बोले रंधावा
पंचायतीराज के इतिहास पर बोलते हुए रंधावा ने कहा कि पंचायतीराज व्यवस्था कांग्रेस की देन है. उन्होंने कहा कि उनके पिता 1955 में पंजाब में सबसे कम उम्र के सरपंच बने थे. बाद में वे ब्लॉक समिति के अध्यक्ष रहे और जब मंत्री बने तो उन्होंने पंचायतीराज विभाग ही अपने पास रखा. उन्होंने कहा कि 1975 में उनके पिता ने पंजाब में पंचायतीराज डायरेक्टरेट बनाया और पंचायतों को वास्तविक अधिकार दिए. उन्होंने कहा कि भाजपा का पंचायतीराज से कोई लेना देना नहीं है
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