
आशुतोष ब्रह्मचारी का फिलवक्त का कुल जमा परिचय तो बस इतना सा है कि यही वो शख्स है, जिसकी अर्जी की सुनवाई करते हुए प्रयागराज की एडीजे कोर्ट ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर पाक्सो का मुकदमा दर्ज करवाया है, लेकिन अगर इस शख्स का इतिहास खंगालें तो पता चलेगा कि यही वो शख्स है, जिसपर बलात्कार से लेकर गो-हत्या, सरकारी ज़मीन पर कब्जे और फर्जीवाड़े के कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं और इन मुकदमों में गिरफ्तारी से बचने के लिए ही बस कंडक्टर के इस बेटे ने न सिर्फ अपना नाम बदला है, बल्कि कपड़े बदलकर वो संन्यासी भी हो गया है और एक मठ का महंत भी, जिसने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली है.
शामली जिले के कांधला के रहने वाले राजेंद्र पांडेय दिल्ली रोड पर चलने वाली प्राइवेट बस में कंडक्टर थे. उनके ही एक बेटे का नाम है अश्विनी पांडेय. पिता की मौत के बाद उसने अपना घर खर्च चलाने के लिए धोखाधड़ी शुरु कर दी. और पहले ही धोखे में उसने एक मंदिर पर कब्जा कर लिया. तब मंदिर के पुजारी हुआ करते थे सचिन गोयल. आरोप है कि साल 2002 में अश्विनी पांडेय ने खुद पर धारदार हथियार से हमला करवाने की साजिश रची और सचिन गोयल पर इसका मुकदमा दर्ज करवा दिया. सचिन ने खुद को बचाने के लिए मंदिर अश्विनी को सौंप दिया. और अब ये मंदिर अश्विनी के ही कब्जे में है. मंदिर शांकभरी देवी का है, जिसमें अश्विनी के चाचा प्रदीप पांडेय मुख्य पुजारी हैं.
18 साल की उम्र में धोखाधड़ी कर लड़ा लोकसभा चुनाव
इस मंदिर पर कब्जे के साथ ही अश्विनी इलाके का चर्चित चेहरा बन गया. 2004 में उसकी उम्र महज 18 साल थी, लेकिन उस साल हुए लोकसभा चुनाव में झूठा हलफनामा देकर वो मुजफ्फरनगर से चुनाव भी लड़ गया. इसका भी केस दर्ज है. 2006 में उसने पड़ोसियों की 25 बीघा ज़मीन हड़प ली, तो इसका भी मुकदमा दर्ज हुआ. 2010 में उसने स्कूल चलाने के नाम पर एक मकान किराए पर लिया, लेकिन उसपर भी कब्जा कर लिया. इसका भी मुकदमा दर्ज है. 2012 में उसे पहली बार जेल जाना पड़ा था, क्योंकि तब उसने एक जज के फर्जी साइन के जरिए तीन लोगों दिनेश कुमार गुप्ता, रामकुमार सिंघल और श्याम कुमार सिंघल के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी कर दिया था. जब तीनों लोग जमानत के लिए हाई कोर्ट पहुंचे तो पता चला कि जज ने ऐसा कोई आदेश ही नहीं दिया है. फर्जीवाड़ा पता चला तो हाई कोर्ट ने अश्विनी को गिरफ्तार करने का आदेश जारी कर दिया.
गिरफ्तार होकर जब ये जेल गया तो उस जेल में भी उसने फर्जीवाड़ा किया और मंत्री माता प्रसाद पांडेय के नाम के फर्जी लेटर के जरिए जेल अधीक्षक के ट्रांसफर का ऑर्डर जारी कर दिया. जमानत पर जब वो बाहर आया तो उसने गोंडा के एसपी को गोमांस बेचने के लिए रिश्वत देने की कोशिश की. गोंडा के तत्कालीन एसपी नवनीत राणा ने स्टिंग के जरिए अश्विनी और गो-तस्कर माजीद हसन के खिलाफ सबूत जुटाए और गो-तस्करी का मुकदमा दर्ज करवाया. उसने एक महिला के साथ रेप भी किया, जिसका मुकदमा दर्ज है. धोखाधड़ी, सरकारी जमीन पर कब्जा और तमाम दूसरे मुकदमों के साथ अश्विनी शामली पुलिस के रिकॉर्ड में बतौर हिस्ट्रीशीटर दर्ज है, जिसका नंबर है 76 ए. इस हिस्ट्रीशीट के मुताबिक अश्विनी पर कुल 27 मुकदमें दर्ज हैं, जो शामली, गोंडा, मुजफ्फरनगर और लखनऊ जैसे जिलों में दर्ज हैं.
उसके खिलाफ गैंगस्टर भी लगा है. वो जिला बदर भी हो चुका है और पुलिस का 25 हजार रुपये का इनामी बदमाश भी. लेकिन ये सब अश्विनी पांडेय के खिलाफ दर्ज मुकदमें हैं और अश्विनी पांडेय अब कोई है ही नहीं, क्योंकि अश्विनी पांडेय ने हिस्ट्रीशीट खुलने और एक के बाद एक 27 मुकदमे दर्ज होने के बाद अपना नाम बदल लिया है और अब वो आशुतोष ब्रह्मचारी हैं.
2022 में जगद्गुरु राम भद्राचार्य से ली दीक्षा
वो आशुतोष ब्रह्मचारी, जिन्होंने साल 2022 में जगद्गुरु राम भद्राचार्य से दीक्षा ली है. दीक्षा लेने के बाद से ही वो मथुरा में रहते हैं. कांधला वाले शाकंभरी पीठ के वो महंत तो हैं हीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के वो अध्यक्ष भी हैं, जिसे उन्होंने खुद बनाया है. वो श्रीकृष्णजन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद मामले में पक्षकार भी बन गए हैं और अब वो संत समागम भी करते हैं. संतों-महंतों के साथ- ही बड़े-बड़े नेताओं से मुलाकात की तस्वीरें भी उनकी वायरल होती रहती हैं.
लिहाजा वो इतने ताकतवर तो हैं हीं कि उनकी क्राइम कुंडली नहीं खुल रही है, उनकी हिस्ट्रीशीट नहीं खुल रही है. हां, उनकी अर्जी पर शंकराचार्य पर पाक्सो का मुकदमा दर्ज हो गया है और ये ऐसा मुकदमा है, जिसमें हर हाल में गिरफ्तारी तय है
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