सुमेरपुर में जलझूलनी एकादशी पर आस्था का महासंगम, ठाकुरजी की पालकी के साथ निकली भव्य रेवाड़ी
सुमेरपुर में जलझूलनी एकादशी पर आस्था का महासंगम, ठाकुरजी की पालकी के साथ निकली भव्य रेवाड़ी

श्री जगन्नाथ महादेव मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा, राम-सीता, महादेव, हनुमान सहित कई झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र

सुमेरपुर। जलझूलनी एकादशी के अवसर पर मंगलवार को देव नगरी सुमेरपुर में भक्ति और आस्था का विशाल नजारा देखने को मिला। श्री जगन्नाथ महादेव मंडल 36 कोम की ओर से आयोजित विशाल रेवाड़ी में शहर सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान ठाकुरजी की पालकी के साथ निकली शोभायात्रा के दौरान शहर के प्रमुख मार्ग धार्मिक जयकारों और भजनों से गूंजते रहे। 22 सितंबर को जलझूलनी एकादशी मनाई गई। इसे परिवर्तिनी एकादशी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है।

ठाकुरजी की पालकी के साथ शुरू हुआ नगर भ्रमण

रेवाड़ी का शुभारंभ श्री जगन्नाथ महादेव मंदिर से हुआ। डीजे, नासिक ढोल और ढोल-थाली की गूंज के बीच भगवान ठाकुरजी की पालकी को लेकर श्रद्धालु शोभायात्रा में आगे बढ़े। पूरे रास्ते ‘हर-हर महादेव’ और ‘श्री ठाकुरजी महाराज की जय’ के जयकारे सुनाई देते रहे। रेवाड़ी के साथ चल रहे श्रद्धालुओं में खासा उत्साह नजर आया।

धार्मिक झांकियों ने खींचा लोगों का ध्यान

शोभायात्रा में विभिन्न धार्मिक एवं पौराणिक प्रसंगों पर आधारित झांकियां शामिल की गईं। श्रीराम-सीता, श्री हनुमान, भगवान महादेव, भगवान विष्णु, सेनजी महाराज और रावण सहित कई झांकियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रेवाड़ी में ऊंट, हाथी और घोड़ों को भी शामिल किया गया। जगह-जगह लोग शोभायात्रा को देखने के लिए सड़क किनारे जमा रहे और अपने मोबाइल में तस्वीरें एवं वीडियो बनाते नजर आए।

शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी रेवाड़ी

श्री जगन्नाथ महादेव मंदिर से रवाना हुई शोभायात्रा खेड़ा देवी, भैरू चौक, श्री महावीर हनुमान मंदिर, मेहता प्याऊ, गांधी चौराहा, उषापुरी गेट और राजगुरु सर्किल होते हुए शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी। इसके बाद रेवाड़ी नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंची, जहां श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए।

भैरू चौक पर युवाओं ने किया पुष्पवर्षा से स्वागत

रेवाड़ी के स्वागत के लिए युवा एकता मंच सुमेरपुर-शिवगंज की ओर से भैरू चौक के पास विशेष व्यवस्था की गई। युवाओं ने भगवान ठाकुरजी की पालकी और शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में युवा और शहरवासी मौजूद रहे।

महावीर हनुमान मंदिर के पास श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी

शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह सेवा की व्यवस्थाएं की गईं। श्री हनुमान जन्मोत्सव समिति की ओर से महावीर हनुमान मंदिर के पास भोजन प्रसादी की व्यवस्था की गई। यहां श्रद्धालुओं को गर्म वड़े परोसे गए।

मेहता प्याऊ पर जीरा पानी की व्यवस्था

मेहता प्याऊ पर लायंस क्लब की ओर से ठंडे जीरा पानी की व्यवस्था की गई। लंबी शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने यहां रुककर पानी ग्रहण किया। इसके अलावा शहर के अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न समाजों एवं संगठनों की ओर से पानी, ज्यूस, प्रसाद और अन्य सेवा व्यवस्थाएं की गईं।

आसपास के गांवों से भी पहुंचे श्रद्धालु

रेवाड़ी में सुमेरपुर के अलावा शिवगंज, पोमावा, पुराड़ा, गलथनी, रामनगर, पराखिया और कोलीवाड़ा सहित आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु पहुंचे। शाम तक शहर के प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और कई स्थानों पर लोगों ने रेवाड़ी का स्वागत किया।

पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में निकली शोभायात्रा

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए रेवाड़ी के मार्ग पर पुलिस की मौजूदगी और यातायात व्यवस्था भी नजर आई। प्रमुख मार्गों एवं चौराहों पर व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी तैनात रहे। शोभायात्रा के दौरान पुलिस एवं स्वयंसेवकों की मदद से भीड़ और यातायात को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया गया, जिससे रेवाड़ी निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ती रही।

सेवा और श्रद्धा का दिखा संगम

जलझूलनी एकादशी की इस रेवाड़ी में धार्मिक उत्साह के साथ सामाजिक सहभागिता भी देखने को मिली। विभिन्न समाजों, संगठनों और युवाओं ने अपने स्तर पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए व्यवस्थाएं कीं। कहीं पुष्पवर्षा हुई तो कहीं पानी और ज्यूस की सेवा, जबकि कई स्थानों पर प्रसाद वितरण किया गया। इससे शोभायात्रा के पूरे मार्ग पर श्रद्धा और सेवा का माहौल नजर आया।

जयकारों से गूंजता रहा सुमेरपुर

भगवान ठाकुरजी की पालकी के साथ निकली विशाल रेवाड़ी के दौरान ढोल-नगाड़ों, नासिक ढोल, भजनों और धार्मिक जयकारों से सुमेरपुर का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्री जगन्नाथ महादेव मंडल 36 कोम की ओर से आयोजित इस रेवाड़ी में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी रही। नीलकंठ महादेव मंदिर पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और जलझूलनी एकादशी के पर्व पर धर्मलाभ लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

Categories