
शिवगंज/सिरोही। सिरोही के पूर्व निर्दलीय विधायक एवं पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा को लॉरेंस बिश्नोई गैंग के विदेशी नेटवर्क द्वारा निशाना बनाने की नाकाम साजिश के खुलासे के बाद पूरे मारवाड़ की राजनीति में जबर्दस्त भूचाल आ गया है। इस गंभीर आपराधिक साजिश ने अब एक बड़े सियासी दंगल का रूप ले लिया है। एक तरफ शिवगंज नगर कांग्रेस अध्यक्ष हनवंत सिंह मेड़तिया ने भाजपा सरकार और राज्य मंत्री ओटाराम देवासी (भोपा जी) पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए पूर्व विधायक को तत्काल ‘Z’ श्रेणी की पुख्ता सुरक्षा देने की मांग उठाई है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व भाजपा महामंत्री व नगर पालिका पार्षद दिनेश बिंदल और सुरेश बिंदल के उस बयान ने खलबली मचा दी है, जिसमें उन्होंने इसे महज राजनीतिक रंजिश मानने से इनकार करते हुए ‘लोढ़ा के साथ व्यापारियों के फोटो व नाम’ मिलने का सनसनीखेज दावा किया है।
कांग्रेस का सीधा हमला: “ओटाराम जी, जब हार्ट अटैक आया था तब कौन पहुंचा था अस्पताल?”
शिवगंज नगर कांग्रेस अध्यक्ष हनवंत सिंह मेड़तिया ने सोशल मीडिया पर बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी को कटघरे में खड़ा किया। मेड़तिया ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर नेटवर्क द्वारा पूर्व विधायक की रेकी और हत्या की कोशिश का सच पुलिस जांच में सामने आ चुका है, तब भी सत्ताधारी भाजपा के स्थानीय विधायकों और मंत्रियों की जुबान पर ताला क्यों लगा है?
मेड़तिया ने राज्य सरकार में पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी को आड़े हाथों लेते हुए अतीत का एक संवेदनशील वाकया याद दिलाया। उन्होंने कहा—
“भोपा जी, आपको तो शर्म आनी चाहिए। ये वही संयम लोढ़ा हैं, जो जयपुर में आपको हार्ट अटैक आने पर आपकी जान की फिक्र करते हुए सबसे पहले अस्पताल पहुंचे थे और ढांढस बंधाया था। आप तो खुद को माताजी का अनन्य पुजारी कहते हैं, फिर आपकी इंसानियत कहां गुम हो गई? क्या राजनीतिक विरोध इंसान की जान से भी बड़ा हो गया है? गोली कभी किसी की राजनीतिक पार्टी पूछकर नहीं चलती।”
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक सुर में मांग की है कि संयम लोढ़ा पर मंडरा रहे प्रत्यक्ष खतरे को देखते हुए राज्य व केंद्र सरकार किसी भी हीले-हवाले के बिना उन्हें तत्काल ‘Z’ श्रेणी सुरक्षा मुहैया कराए।
बिंदल ने क्यों छेड़ा ‘व्यापारी एंगल’? बयान के पीछे छिपी इनसाइड स्टोरी
इधर, भाजपा के पूर्व जिला पदाधिकारी और पार्षद दिनेश बिंदल व सुरेश बिंदल द्वारा दिए गए बयान ने मामले को पूरी तरह नया मोड़ दे दिया है। बिंदल ने कहा कि सिरोही जैसे शांत इलाके में ऐसी वारदात की साजिश दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन साथ ही उन्होंने दावा किया कि “विधायक के साथ कुछ व्यापारियों के फोटो मिले हैं और कई नाम भी सामने आए हैं।”
बिंदल के इस बयान के पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषक तीन बड़े गहरे सियासी संकेत देख रहे हैं:
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राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को कुंद करना:
विपक्ष (कांग्रेस) इस साजिश को सीधे तौर पर भजनलाल सरकार की कानून-व्यवस्था की विफलता और राजनीतिक दुर्भावना से जोड़ने की कोशिश कर रहा था। बिंदल ने “राजनीति न करने” की नसीहत दी और यह स्थापित करने की कोशिश की कि सरकार ने इनपुट मिलते ही तुरंत सुरक्षा दी है।
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क्राइम सिंडिकेट की रंगदारी और व्यावसायिक विवाद की ओर रुख मोड़ना:
जांच एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक लॉरेंस गैंग के निशाने पर मारवाड़, शिवगंज और सुमेरपुर के कई बड़े उद्योगपति व कारोबारी भी थे, जिनसे करोड़ों की रंगदारी मांगी जानी थी। बिंदल का यह कहना कि ‘व्यापारियों के फोटो और नाम मिले हैं’, दरअसल यह नैरेटिव सेट करने की सोची-समझी रणनीति है कि इस साजिश की जड़ें राजनीतिक दुश्मनी के बजाय जमीन, हवाला, भारी-भरकम व्यावसायिक लेन-देन या रंगदारी के नेटवर्क से जुड़ी हो सकती हैं।
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लोढ़ा के करीबियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव:
सिरोही-शिवगंज के कई प्रभावशाली भामाशाह और कारोबारी संयम लोढ़ा के राजनीतिक मददगार रहे हैं। बिंदल द्वारा सार्वजनिक रूप से यह कहना कि पुलिस को तस्वीरें और नाम मिले हैं, सीधा संकेत है कि जांच का दायरा केवल नेपाल से आए शूटरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पर्दे के पीछे खड़े संपर्कों और वित्तीय तारों तक भी पहुंचेगा।
सिरोही में आर-पार की जंग: कानून व्यवस्था बनाम राजनीतिक अस्तित्व
एक तरफ जहां पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) हरियाणा और नेपाल से जुड़े इस खूनी सिंडिकेट की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, वहीं सिरोही की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस इसे सीधे तौर पर एक कद्दावर जनप्रतिनिधि की आवाज दबाने और जानलेवा लापरवाही का मामला बताकर ‘Z’ सुरक्षा की मांग पर अड़ी है, तो वहीं भाजपा खेमा इसे व्यावसायिक कड़ियों और गैंगस्टरों की आपराधिक वसूली का एंगल देकर राजनीतिक लाभ लेने के प्रयासों की हवा निकालने में जुट गया है
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