
बांग्लादेश में प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद देश का माहौल तेजी से तनावपूर्ण होता जा रहा है. इस घटना ने न सिर्फ राजनीतिक उथल-पुथल को बढ़ाया है, बल्कि सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव को भी गहरा कर दिया है. उसके असर से सुरक्षा, विरोध प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव के मद्देनजर बड़े अपडेट सामने आए हैं
सांप्रदायिक तनाव की एक और भयावह घटना में मैमनसिंह जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक दीपू चंद्र दास को भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप में पीट‑पीटकर मार डाला और मृत शरीर को पेड़ से लटका कर आग के हवाले कर दिया. पुलिस और रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने इस मामले में लगभग दस लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि शेष को संदिग्ध के रूप में हिरासत में लिया गया है. इस घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरा संकट पैदा कर दिया है, और अंतरिम सरकार ने इसकी कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है
शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद भड़की हिंसा
32 वर्षीय हादी, जो पिछले साल हुए छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के प्रमुख नेता थे, पर 12 दिसंबर को ढाका के बिजॉयनगर इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान नकाबपोश हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी. गंभीर रूप से घायल हादी को इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था, जहां गुरुवार को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. हादी की मौत के बाद देशभर में गुस्सा फैल गया है. राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं. कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए हैं. इस दौरान कुछ समाचार पत्र कार्यालयों पर हमले किए गए, मीडिया संस्थानों में तोड़फोड़ हुई और सड़कों पर पत्थरबाजी की गई. चटगांव में भारतीय सहायक उच्चायोग के आवास पर भी पथराव की घटना सामने आई है.
हादी का अंतिम संस्कार भारी सुरक्षा के बीच ढाका विश्वविद्यालय के पास राष्ट्रीय कवि काजी नजरुल इस्लाम के समीप हुआ, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए और प्रदर्शनकारियों ने ‘दिल्ली या ढाका-ढाका, ढाका’ और ‘भाई हादी का खून व्यर्थ नहीं जाएगा’ जैसे नारे लगाए. इसी अवसर पर हादी की पार्टी ने अंतरिम सरकार को 24‑घंटे का अल्टीमेटम दिया, जिसमें हादी की हत्या के जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी में स्पष्ट प्रगति की मांग की गई है
सबसे पहले सिलहट शहर में भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, ताकि हादी की मौत के बाद उत्पन्न तनाव का अनुचित रूप से कोई फायदा न उठा सके. सुरक्षा बलों को शनिवार से ही विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर लगातार तैनात किया गया है, जिसमें सहायक उच्चायोग कार्यालय, उच्चायोग अधिकारी का निवास तथा वीजा केंद्र शामिल हैं. इससे पहले वहां ‘इंकलाब मंच’ के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. गणो अधिकार परिषद ने सहायक उच्चायोग कार्यालय का घेराव करने का कार्यक्रम घोषित किया था और कुछ समूहों ने सिलहट के शहीद मिनार के सामने जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें भारत विरोधी नारे भी लगाए गए
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