
इंदौर में दूषित पानी पीने से 14 लोगों की मौत ने पूरे शहरवासियों को हिला दिया है स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में भी पेयजल दूषित पाया गया। यह जांच मेडिकल कॉलेज ने की थी। नर्मदा लाइन पर बगैर अनुमति के शौचालय बन गया और उसका रिसाव होता रहा, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। हैरानी की बात है कि पार्षद, जोनल अधिकारी को गंदे पानी की सप्लाई की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने मामले को हल्के में लिया।
भागीरथपुरा बस्ती में तीन बोरिंग भी हैं। उनसे भी पानी सप्लाई होता है। कई लोग नर्मदा के पानी के बजाय बोरिंग का पानी पीते हैं। इस कारण रोगियों की संख्या नहीं बढ़ी। जो लोग नर्मदा जल पीते थे, वे ही बीमार हुए हैं, लेकिन अब बस्तीवासी नर्मदा लाइन का पानी नहीं पी रहे हैं। रहवासी भावना यादव ने कहा कि नर्मदा का पानी मटमैला तो नहीं आता था, लेकिन उसमें बदबू आती थी। उस पानी के सेवन से लोगों को इन्फेक्शन ज्यादा हुआ है। हमारे यहाँ निजी बोरिंग है, उसका ही पानी हम पीने के उपयोग में लेते हैं। इस कारण हम बीमार नहीं हुए।
भागीरथपुरा में नर्मदा और बोरिंग की डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों के आसपास ही गंदा पानी बहता है। इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद अभी भी कई गलियों में इस तरह के हालात हैं। पान वाली गली के बोरिंग के पास ही सड़क से बहता गंदा पानी मिल रहा था। उस लाइन से पांच फीट दूर ही ड्रेनेज का चैंबर भी है। इस वार्ड की बैकलेन में अतिक्रमण है। लोग नाराज न हों, इसके चलते जनप्रतिनिधि सख्ती भी ज्यादा नहीं दिखाते।
हाई कोर्ट में दो जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
इंदौर के भागीरथपुरा पानी कांड मामले में अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा गया है. इस गंभीर मामले को लेकर हाई कोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कुछ अहम निर्देश दिए हैं. दरअसल इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं दाखिल की गई थी. पहली जनहित याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी द्वारा दायर की गई, वहीं दूसरी याचिका कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने दाखिल की थी.
दोनों ही याचिकाओं में इस मामले के दोषियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है. साथ ही पीड़ितों के निःशुल्क इलाज और उन्हें उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग उठाई गई है.
2 जनवरी को होगी अगली सुनवाई
हाई कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सभी प्रभावित लोगों के उचित और निःशुल्क इलाज के निर्देश दिए हैं. न्यायालय ने शासन और प्रशासन से कहा है कि वे मृतकों और प्रभावित लोगों के इलाज से संबंधित पूरी जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें. वहीं इस मामले में अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी, जिसमें शासन और प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट सामने रखना होगी
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