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राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू

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राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार 'एक प्रदेश-एक चुनाव'; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू
राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू

जयपुर। राजस्थान में बहुप्रतीक्षित पंचायती राज चुनावों की आधिकारिक घोषणा हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की सभी 41 जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के लिए विस्तृत चुनावी कार्यक्रम जारी कर दिया है। पूरे प्रदेश में चुनाव चार चरणों में संपन्न कराए जाएंगे। आयोग की इस घोषणा के साथ ही प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में तत्काल प्रभाव से आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब राज्य सरकार की ‘एक देश-एक चुनाव’ की तर्ज पर ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’ की नीति के तहत सभी जिला परिषदों और पंचायत समितियों के सदस्यों के चुनाव एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं।

जिला परिषद व पंचायत समिति सदस्यों की वोटिंग EVM से, 20 नवंबर को मतगणना

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के जरिए करवाए जाएंगे। इन दोनों महत्वपूर्ण पदों के लिए चार चरणों का मतदान शेड्यूल इस प्रकार रहेगा:

  • पहला चरण: मतदान 23 अक्टूबर को होगा।

  • दूसरा चरण: मतदान 29 अक्टूबर को होगा।

  • तीसरा चरण: मतदान 4 नवंबर को होगा।

  • चौथा चरण: मतदान 14 नवंबर को होगा।

चारों चरणों में डाले गए वोटों की गणना एक साथ 20 नवंबर को होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि, कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली जिलों में जिला प्रमुख और प्रधानों के चुनाव प्रशासनिक व्यवस्थाओं के तहत दिसंबर माह में संपन्न होंगे, लेकिन इन जिलों के जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव बाकी प्रदेश के साथ ही होंगे।

सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव मतपत्र से, उसी रात आएंगे नतीजे

गांव की सरकार यानी सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर (मतपत्र) से संपन्न कराए जाएंगे। सरपंच पद के लिए भी मतदान चार चरणों में तय किया गया है:

  • प्रथम चरण: 25 अक्टूबर को वोटिंग

  • द्वितीय चरण: 31 अक्टूबर को वोटिंग

  • तृतीय चरण: 6 नवंबर को वोटिंग

  • चतुर्थ चरण: 16 नवंबर को वोटिंग

सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव की खासियत यह रहेगी कि मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद पोलिंग बूथों पर ही वोटों की गिनती शुरू होगी और उसी दिन देर रात तक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

नामांकन और नाम वापसी का पूरा कार्यक्रम

जिला परिषद, पंचायत समिति और सरपंच पदों के लिए आयोग ने विस्तृत तिथियां तय की हैं:

  1. जिला परिषद सदस्य: सभी चार चरणों के लिए अधिसूचना और नामांकन की प्रक्रिया 8 अक्टूबर से शुरू होगी। नामांकन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर और नाम वापसी 15 अक्टूबर रखी गई है।

  2. पंचायत समिति सदस्य:

    • प्रथम चरण के लिए नामांकन 8 से 13 अक्टूबर (नाम वापसी 15 अक्टूबर)।

    • द्वितीय चरण के लिए नामांकन 13 से 16 अक्टूबर (नाम वापसी 19 अक्टूबर)।

    • तृतीय चरण के लिए नामांकन 19 से 23 अक्टूबर (नाम वापसी 26 अक्टूबर)।

    • चतुर्थ चरण के लिए नामांकन 31 अक्टूबर से 4 नवंबर (नाम वापसी 6 नवंबर)।

  3. सरपंच चुनाव:

    • पहले चरण के लिए नामांकन 8 से 24 अक्टूबर तक लिए जाएंगे और 24 अक्टूबर को ही नाम वापसी होगी।

    • दूसरे चरण के लिए नामांकन 13 से 30 अक्टूबर (नाम वापसी 30 अक्टूबर)।

    • तीसरे चरण के लिए नामांकन 19 अक्टूबर से 5 नवंबर (नाम वापसी 5 नवंबर)।

    • चौथे चरण के लिए नामांकन 31 अक्टूबर से 15 नवंबर (नाम वापसी 15 नवंबर)।

आधी आबादी को 50% आरक्षण, जयपुर में सबसे अधिक और जैसलमेर में सबसे कम मतदाता

इस बार के पंचायती राज चुनावों में महिलाओं की निर्णायक भूमिका देखने को मिलेगी। नियमों के तहत महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है। आंकड़ों के लिहाज से कुल मतदाताओं में 51.82 प्रतिशत पुरुष और 48.18 प्रतिशत महिला मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगी। प्रदेश के 41 जिलों में सबसे अधिक 18.99 लाख ग्रामीण मतदाता जयपुर जिले में हैं, जबकि सबसे कम 4.36 लाख मतदाता सीमावर्ती जैसलमेर जिले में पंजीकृत हैं।

आचार संहिता प्रभावी: शिलान्यास, उद्घाटन और तबादलों पर पूर्ण पाबंदी

चुनाव कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता की सख्त पाबंदियां लागू हो चुकी हैं:

  • पंचायती राज से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

  • मंत्री और जनप्रति‍निधि अब ग्रामीण क्षेत्रों के दौरों के लिए सरकारी वाहनों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, न ही वे सरकारी डाक बंगलों और सर्किट हाउस में राजनीतिक बैठकें कर पाएंगे।

  • सरकार किसी भी नई योजना या लोकलुभावन कार्यक्रम की घोषणा नहीं कर सकेगी।

  • पूर्व से स्वीकृत और प्रक्रियाधीन विकास कार्यों व टेंडरों पर कोई रोक नहीं होगी, लेकिन कोई भी नया उद्घाटन या शिलान्यास नहीं किया जा सकेगा ताकि मतदाताओं को प्रभावित होने से बचाया जा सके।

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