
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति मामले से जुड़े कथित घोटाले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. पंजाब विधानसभा चुनाव से लगभग एक साल पहले आए इस निर्णय का पंजाब की राजनीति पर असर देखने को मिलेगा.
अरविंद केजरीवाल के पक्ष में कोर्ट का फैसला आते ही पंजाब के AAP नेता खुश दिखे, तो वहीं राजनीतिक आक्रामकता भी उनके बयानों में साफ दिख रही थी.
‘देश की राजनीति भी तय करेगी AAP’- पंजाब अध्यक्ष
आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी इस फैसले को बड़े पैमाने पर पंजाब में राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर सकती है. इसकी झलक फैसला आते ही पार्टी के नेताओं ने दिखा दी. आप के पंजाब अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा है कि इस फैसले का असर पंजाब की राजनीति पर पड़ेगा.
अमन अरोड़ा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी पंजाब की सत्ता में वापसी करेगी. उन्होंने दावा किया कि AAP आने वाले दिनों में देश की राजनीति भी तय करेगी.
कांग्रेस का दावा- पंजाब पर नहीं पड़ेगा कोई असर
वहीं, पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा है कि इस फैसले का पंजाब की राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, क्योंकि पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी सरकार के काम को लेकर सवाल कर रही है और राज्य में चुनाव पंजाब के मुद्दों पर लड़ा जाएगा.
वहीं, पंजाब बीजेपी के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा, “पंजाब के लागों को अरविंद केजरीवाल के कट्टर ईमानदार होने के दावे में उतना ही विश्वास है जितना उन्हें गुरदासपुर में हुए एक पुलिस एनकाउंटर पर है”.
दरअसल, गुरदासपुर में पंजाब पुलिस के एक ASI और पंजाब होम गार्ड के जवान की गोली मारकर की गई हत्या कर दी गई थी. इस मामले में एक आरोपी पुलिस एनकाउंटर में मारा गया है. इसे लेकर विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं कि ये एनकाउंटर फर्जी था.
पंजाब में अब और सक्रिय होंगे अरविंद केजरीवाल
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पहले से ही पंजाब में बहुत सक्रिय हैं. दिल्ली की अदालत के इस फैसले के बाद वे पंजाब में अब और ज्यादा ताकत झोंकेंगे, जिससे राज्य की राजनीति और दिलचस्प होगी.
बता दें, अरविंद केजरीवाल का यह सपना है कि पंजाब में दोबारा उनकी सरकार आए. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि दिल्ली की अदालत के फैसले को AAP अपने पक्ष में कितना भुना पाती है. वहीं, बीजेपी और कांग्रेस पर भी यह दबाव होगा कि जनता को यह समझाया जा सके कि यह कानूनी लड़ाई लंबी है और समय अभी भी पलट सकता है
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