राजस्थान कांग्रेस जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी होने के बाद किया गुटबाजी पर लगेगी लगाम? या और बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन
राजस्थान कांग्रेस जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी होने के बाद किया गुटबाजी पर लगेगी लगाम? या और बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन

शनिवार (22 नवंबर) देर रात राजस्थान कांग्रेस के 45 जिलाध्यक्षों की लिस्ट का इंतजार खत्म हुआ. कांग्रेस ने एक नए प्रयोग के तहत सूची जारी की है, जिसमें कई नाम चौंकाने वाले रहे. संगठन सृजन अभियान का उद्देश्य कांग्रेस को लंबे समय से खोखला कर रही गुटबाजी को खत्म करना है. इसके लिए ही कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर ये नया प्रयोग शुरू किया गया. हर जिले में नियुक्त पर्यवेक्षकों ने पंचायत स्तर तक संवाद किया और रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को भेजी. इस रिपोर्ट के आधार पर ही नए अध्यक्षों के नाम पर मुहर लगी

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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के हाई कमान की यह कवायद कितनी सफल हो पाती है. वही, इस अभियान के तहत कई जगहों पर कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आई. पाली, अजमेर, कोटा समेत कई शहरों में गुटबाजी का प्रभाव देखने को मिला

आखिर कियो विधायको को जिलाध्यक?

देखा जाए तो राजस्थान कांग्रेस की राजनीती देश में प्रचलित मानी जाती हे राजस्थान कांग्रेस के पास कार्यकर्ताओ की कमी नही हे बड़े बड़े दिग्गज नेता आज भी कांग्रेस की विचारधाराओ के साथ जुड़े हे बहुत से कार्यकर्ता कांग्रेस की नीव बनकर कांग्रेस के साथ खड़े हे लेकिन किया कारण रहा होगा जो कांग्रेस हाईकमान को अपने विधायको को ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष बनाने पड़े, किया विधायक के अलावा जिले में कोई वरिष्ठ कार्यकर्ता नही बचा या कार्यकर्ता कोइ दाइत्व लेना नही चाहता ? सवाल तो बहुत उठ रहे हे सब लोगो की अलग अलग राय हे और प्रदेश में विधायको को जिला अध्यक्ष बनाना एक चर्चा का विषय बना हुआ हे

किया पाली की गुटबाजी पर लगेगी लगाम?

राजस्थान कांग्रेस के 45 जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी की है जिसमे कई विधायक भी जिलाध्यक्ष बने हे और कुछ नए लोगो को मोका दिया गया हे हालाँकि जिलाध्यक्षों की लिस्ट जारी होने के बाद कई जिलो में उत्साह हे और कई जिलो में मायूसी देखने को मिली, उत्साह का तो समझ आता हे की कार्यकर्ता इस नियुक्ति से खुस हे लेकिन कुछ जगहों में मायूसी होना मतलब कार्यकर्ताओ के विपरीत नियुक्ति हुई हे ऐसा ही एक नजारा पाली जिले में देखने को मिला, पाली जिले में राजस्थान कांग्रेस ने शिशुपाल सिंह राजपुरोहित को कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनाया गया। राजनीती जानकारों ने बताया की राजपुरोहित की जिले में सक्रियता नही होने से आने वाले चुनावो में पार्टी को भारी नुकसान हो सकता हे कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओ का मानना हे की राजपुरोहित कोरोना के बाद जिले की राजनीती में सक्रिय हुए, राजपुरोहित ने पिछले विधानसभा चुनाव में विधायक के लिए टिकट की भी डिमांड की थी। लेकिन पार्टी ने उनको टिकिट नही दिया था पाली जिले में कांग्रेस के कई दिग्गज नेता जिलाध्यक्ष की लिस्ट में थे लेकिन शिशुपाल सिंह राजपुरोहित के नाम की घोषणा से जिले के कई नेताओ को चौंका दिया हे इन बातों से ये तो समझ आता हे की पाली जिले के जिलाध्यक्ष की नियुक्ति से जिले के कुछ कार्यकर्ताओ में मायूसी हे और आगे आने वाले समय में पाली जिले में गुटबाजी हो सकती हे ?

वहीं, जयपुर शहर के लिए मुख्य रूप से सुनील शर्मा और पुष्पेंद्र भारद्वाज के बीच मामला फंसा हुआ है. वर्तमान अध्यक्ष आर आर तिवाड़ी भी दावेदारों में शामिल बता चुके हैं. इस लिहाज से जयपुर शहर की सीट पर ब्राह्मण चेहरों के बीच पेंच फंसा हुआ है. पुष्पेंद्र भारद्वाज विधानसभा चुनाव में सांगानेर से कांग्रेस प्रत्याशी रहे हैं. जबकि ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी के को-फाउंडर सुनील शर्मा को कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया था. लेकिन उनके जयपुर डायलॉग नाम की संस्थान से जुड़े होने के विवाद के बाद टिकट काट दिया गया था. ऐसे में उनके अध्यक्ष पद की दावेदारी को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं

अभियान के वक्त आए थे विवाद 

अभियान के वक्त कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक्स पर पोस्ट कर अभियान में नेताओं के दखल पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने लिखा था कि संगठन सृजन अभियान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक नायाब प्रयोग है. इसमें जिले के सभी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं की राय लेकर जिला अध्यक्ष चुना जाएगा.

उनका कहना था, “कई जगह पर किसी नेता को जिला अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव या किसी सीनियर लीडर को जिला अध्यक्ष बनाने के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव पास करने की खबरें आई हैं, जो उचित नहीं है. किसी भी सीनियर लीडर द्वारा अपने प्रभाव का इस्तेमाल या कार्यकर्ताओं द्वारा प्रस्ताव पास करना हाईकमान की भावना के अनुरूप नहीं है.” गहलोत ने मीडिया से बातचीत के दौरान भी कहा था कि अभियान के तहत जो लोग भी नियुक्त किए जाएंगे. सभी को उनका स्वागत करना चाहिए.

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