
पिंडवाड़ा (सिरोही)। राजस्थान के सिरोही जिले में पिंडवाड़ा थाना क्षेत्र के ऐसाऊ गांव में शुक्रवार को गणपति विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां नदी में प्रतिमा विसर्जन के समय 15 वर्षीय एक नाबालिग किशोर गहरे पानी में चला गया और डूबने से उसकी मौत हो गई। करीब दो घंटे चले कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सिविल डिफेंस की टीम ने शव को बाहर निकाला।
विसर्जन के उत्साह के बीच पसरा मातम
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार दोपहर बाद ऐसाऊ गांव की नदी के पास गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा हुए थे। लोगों में भारी उत्साह था और विसर्जन का दौर चल रहा था। इसी दौरान झाडोली निवासी सुमित कुमार (15), पुत्र कैलाश प्रजापत, अचानक गहरे पानी में चला गया।
जब तक लोग कुछ समझ पाते, सुमित पानी में पूरी तरह डूब गया। किशोर को डूबता देख मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार शुरू हो गई। स्थानीय लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी गहरा होने के कारण सफलता नहीं मिली।

दो घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही पिंडवाड़ा प्रशासन और पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पिंडवाड़ा एसडीएम नरेंद्र जांगिड़, डीएसपी राहुल मीणा और थानाधिकारी चैल सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया और बचाव कार्य शुरू कराया।
प्रशासन ने तुरंत सिरोही से सिविल डिफेंस की एक्सपर्ट टीम को मौके पर बुलाया। सिविल डिफेंस के गोताखोरों ने नदी में उतरकर किशोर की तलाश शुरू की। करीब दो घंटे की भारी मशक्कत और तलाश के बाद टीम ने किशोर का शव बरामद कर लिया। शव को पानी से बाहर निकालते ही वहां मौजूद परिजनों और ग्रामीणों में कोहराम मच गया।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा शव
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पिंडवाड़ा के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में पहुंचाया। पिंडवाड़ा थाना अधिकारी के अनुसार, परिजनों की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। किशोर की मौत से उसके गांव और परिवार में गहरा शोक व्याप्त है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर त्यौहारों के दौरान विसर्जन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं:
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सुरक्षाकर्मियों की तैनाती: क्या विसर्जन स्थल पर भीड़ को नियंत्रित करने और गहरे पानी में जाने से रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस या गोताखोर तैनात थे?
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बचाव उपकरण: क्या मौके पर तत्काल बचाव के लिए लाइफ जैकेट, रस्सियां या नावें उपलब्ध थीं?
पिंडवाड़ा पुलिस अब इन पहलुओं की जांच कर रही है कि हादसे के वक्त सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और बचाव व्यवस्था में कहां कमी रही। इस घटना के बाद अन्य विसर्जन स्थलों पर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने की मांग उठने लगी है।
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