Exclusive
Breaking News

पंचायत बजट से अलग: जानिए ग्राम पंचायत में सड़कों और बड़े विकास कार्यों के लिए राज्य व केंद्र सरकार से कैसे आता है करोड़ों का फंड पंचायत बजट से अलग: जानिए ग्राम पंचायत में सड़कों और बड़े विकास कार्यों के लिए राज्य व केंद्र सरकार से कैसे आता है करोड़ों का फंड

गांव की सरकार: जानिए क्या हैं सरपंच और वार्ड पंच के असली अधिकार, काम और फंड का पूरा गणित; पंचायती राज व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत गांव की सरकार: जानिए क्या हैं सरपंच और वार्ड पंच के असली अधिकार, काम और फंड का पूरा गणित; पंचायती राज व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत

पाली-सुमेरपुर अंचल में चुनावी बिगुल: पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही ग्रामीण सियासत गरमाई; 4 चरणों में होगा मतदान, गांवों में आचार संहिता लागू पाली-सुमेरपुर अंचल में चुनावी बिगुल: पंचायत चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही ग्रामीण सियासत गरमाई; 4 चरणों में होगा मतदान, गांवों में आचार संहिता लागू

CM भजनलाल शर्मा का रविवार को पाली दौरा: लघु उद्योग भारती के राज्य स्तरीय सम्मेलन में करेंगे शिरकत; एक सप्ताह में पाली जिले का दूसरा दौरा, प्रशासनिक तैयारियां तेज CM भजनलाल शर्मा का रविवार को पाली दौरा: लघु उद्योग भारती के राज्य स्तरीय सम्मेलन में करेंगे शिरकत; एक सप्ताह में पाली जिले का दूसरा दौरा, प्रशासनिक तैयारियां तेज

राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल: 4 चरणों में होगा मतदान, इतिहास में पहली बार ‘एक प्रदेश-एक चुनाव’; ग्रामीण इलाकों में आचार संहिता लागू

गांव की सरकार: जानिए क्या हैं सरपंच और वार्ड पंच के असली अधिकार, काम और फंड का पूरा गणित; पंचायती राज व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत
गांव की सरकार: जानिए क्या हैं सरपंच और वार्ड पंच के असली अधिकार, काम और फंड का पूरा गणित; पंचायती राज व्यवस्था की ज़मीनी हकीकत

विशेष रिपोर्ट। राजस्थान में पंचायती राज चुनावों का बिगुल बजते ही चौपालों पर चुनावी गुणा-गणित तेज हो गया है। गांव की सियासत में ‘सरपंच’ और ‘वार्ड पंच’ दो सबसे बुनियादी और अहम धुरियां हैं। लेकिन अक्सर आम जनता और खुद प्रत्याशियों के मन में यह सवाल रहता है कि एक वार्ड पंच और सरपंच के पास वास्तव में क्या अधिकार होते हैं, वे कौन-कौन से काम करवा सकते हैं और विकास कार्यों के लिए किसे कितना बजट व फंड मिलता है? पंचायती राज अधिनियम और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत इन दोनों पदों की शक्तियों और वित्तीय प्रावधानों की पूरी पड़ताल इस प्रकार है:

1. वार्ड पंच: अधिकार, कार्य और फंड का सच

पंचायती राज अधिनियम के तहत एक ग्राम पंचायत कई वार्डों में बंटी होती है और हर वार्ड का निर्वाचित जनप्रतिनिधि ‘वार्ड पंच’ कहलाता है। अधिनियम की मूल भावना के अनुसार ‘पंचायती राज’ है, ‘सरपंच राज’ नहीं—यानी पंचायत का कोई भी निर्णय पंचों की सहमति के बिना अधूरा है।

मुख्य कार्य और अधिकार

  • वार्ड सभा की अध्यक्षता: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 7 के तहत अपने वार्ड की ‘वार्ड सभा’ बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना वार्ड पंच का प्रमुख दायित्व है। वार्ड के विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय कर प्रस्ताव ग्राम पंचायत को भेजे जाते हैं।

  • ग्राम पंचायत की बैठकों में मताधिकार: ग्राम पंचायत की पाक्षिक/मासिक बैठक में वार्ड पंच का वोट अनिवार्य होता है। किसी भी कार्य, नाली निर्माण, सड़क, ट्यूबवेल या सफाई योजना को पास कराने के लिए वार्ड पंच का समर्थन जरूरी है।

  • पात्र लाभार्थियों का चयन: प्रधानमंत्री आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, बीपीएल सूची, खाद्य सुरक्षा (NFSA) और मनरेगा जॉब कार्ड जैसे सरकारी लाभों में अपने वार्ड के पात्र गरीबों का नाम जुड़वाना और अपात्रों पर आपत्ति दर्ज कराना।

  • कार्यों की निगरानी और भौतिक सत्यापन: वार्ड में हो रहे किसी भी सरकारी निर्माण की गुणवत्ता, स्कूल-आंगनबाड़ी के संचालन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) की निगरानी का सीधा अधिकार वार्ड पंच को है।

  • अविश्वास प्रस्ताव की ताकत: यदि सरपंच नियमविरुद्ध कार्य करे या वित्तीय अनियमितता करे, तो वार्ड पंच मिलकर सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की संवैधानिक शक्ति रखते हैं।

वार्ड पंच को कितना फंड मिलता है?

  • व्यक्तिगत फंड का कोई प्रावधान नहीं: कई लोगों में यह गलतफहमी होती है कि वार्ड पंच को अपने स्तर पर खर्च करने के लिए कोई अलग से फंड या बैंक खाता मिलता है। कानूनी रूप से वार्ड पंच के नाम से कोई अलग व्यक्तिगत फंड जारी नहीं होता है।

  • वार्ड के लिए बजट आवंटन: ग्राम पंचायत को जो भी केंद्रीय या राज्य वित्त आयोग (15th Finance Commission & SFC) का बजट मिलता है, ग्राम पंचायत की साधारण सभा में वार्ड पंच अपने वार्ड की जनसंख्या और जरूरत के आधार पर प्रस्ताव पारित कराकर विकास कार्य स्वीकृत करवाते हैं।

  • मानदेय व बैठक भत्ता: वार्ड पंच को कोई नियमित मासिक वेतन नहीं मिलता। राजस्थान में वार्ड पंच को पंचायत की प्रत्येक बैठक में भाग लेने पर निर्धारित बैठक भत्ता (सिटिंग फीस) दिया जाता है, जो हालिया संशोधनों के अनुसार लगभग ₹276 से ₹300 प्रति बैठक के आसपास है।

2. सरपंच: अधिकार, कार्य और विकास फंड का दायरा

सरपंच ग्राम पंचायत का संवैधानिक और प्रशासनिक मुखिया होता है। ग्राम पंचायत की समस्त कार्यकारी शक्तियां सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO/सचिव) के संयुक्त हस्ताक्षर से संचालित होती हैं।

मुख्य कार्य और अधिकार

  • प्रशासनिक व वित्तीय नेतृत्व: ग्राम पंचायत की बैठकों की अध्यक्षता करना, ग्राम सभा बुलाना और गांव के सालाना विकास प्लान (GPDP – ग्राम पंचायत डेवलपमेंट प्लान) को धरातल पर उतारना।

  • निर्माण कार्यों की स्वीकृति: गांव में सीसी रोड, ग्रेवल सड़कें, ड्रेनेज/नाली, सार्वजनिक शौचालय, श्मशान/कब्रिस्तान की चारदीवारी, सामुदायिक भवन और खेल मैदानों का निर्माण करवाना।

  • जमीन और पट्टा आवंटन: ग्राम पंचायत क्षेत्र में आबादी भूमि के नियमन, 609/नियम 157 के तहत पट्टे जारी करने, गोचर व चारागाह भूमि के संरक्षण और सार्वजनिक अतिक्रमण हटाने की सीधी जिम्मेदारी सरपंच की होती है।

  • जल और प्रकाश व्यवस्था: गांव में स्ट्रीट लाइट लगवाना, हैंडपंप/नलकूपों की मरम्मत और पेयजल की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना।

  • जन्म-मृत्यु और विवाह प्रमाण पत्र: स्थानीय स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने व प्रशासनिक अनुमतियां देने का अधिकार।

  • मनरेगा का क्रियान्वयन: मनरेगा योजना के तहत ग्रामीणों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना, मस्टररोल जारी कराना और ग्रेवल, तलाई खुदाई जैसे काम स्वीकृत कराना।

सरपंच को कितना फंड मिलता है?

सरपंच को मिलने वाला फंड किसी तय निश्चित राशि के रूप में नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत की जनसंख्या, क्षेत्रफल और सरकारी योजनाओं के तहत ग्राम पंचायत के अधिकृत खाते में आता है। औसतन एक सामान्य ग्राम पंचायत में सालाना लाखों से करोड़ों रुपये के काम होते हैं:

  1. केंद्रीय वित्त आयोग (15th Finance Commission) और राज्य वित्त आयोग (SFC):

    • एक सामान्य ग्राम पंचायत (3,000 से 8,000 की आबादी) को बुनियादी सुविधाओं—पेयजल, स्वच्छता, ठोस व तरल कचरा प्रबंधन और टाइड/अनटाइड मद में सालाना लगभग ₹25 लाख से ₹60 लाख तक का सीधा फंड मिलता है। बड़ी पंचायतों में यह राशि इससे भी अधिक हो सकती है।

  2. महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA):

    • मनरेगा के तहत लेबर बजट और सामग्री मद (Material Component) के जरिए गांव में सालभर में ₹50 लाख से ₹1.5 करोड़ तक के काम (तलाई, नाडे, ग्रेवल सड़क, मॉडल खेल मैदान आदि) करवाए जाते हैं।

  3. विधायक व सांसद कोष (MLA/MP LAD) एवं DMFT:

    • स्थानीय विधायक, सांसद या खनिज प्रभावित क्षेत्रों में डीएमएफटी फंड से पंचायत को विशेष कार्यों के लिए अलग से ₹10 लाख से ₹50 लाख तक की अनुशंसा राशि मिलती है।

  4. स्वच्छ भारत मिशन (SBM-G) व जल जीवन मिशन (JJM):

    • कचरा संग्रहण वाहन, सामुदायिक सोख्ता गड्ढे, कचरा निस्तारण केंद्र और घर-घर नल कनेक्शन के रखरखाव के लिए अलग से बजट प्राप्त होता है।

  5. सरपंच का मानदेय: राजस्थान में सरपंच को प्रति माह एक निर्धारित मानदेय मिलता है, जो वर्तमान में लगभग ₹6,679 से ₹7,347 प्रति माह निर्धारित है।

सामूहिक निर्णय से ही चलता है गांव का विकास

पंचायती राज का विधिक ढांचा यह स्पष्ट करता है कि सरपंच अकेले मनमर्जी से पंचायत का फंड खर्च नहीं कर सकता। किसी भी पैसे की निकासी और भुगतान के लिए सरपंच और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) के डिजिटल डोंगल (हस्ताक्षर) लगते हैं, लेकिन उस कार्य की स्वीकृति ग्राम सभा और वार्ड पंचों की बैठक के कोरम में पारित प्रस्ताव से ही वैध मानी जाती है। इसलिए वार्ड पंच की सजगता और सरपंच की जवाबदेही ही किसी ग्राम पंचायत को भ्रष्टाचार मुक्त और विकसित बना सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

Categories