जयपुर नगर निगम में BJP का परचम: सुनील कोठारी बने नए मेयर, कांग्रेस की सुनीता को 29 वोटों से हराया
जयपुर नगर निगम में BJP का परचम: सुनील कोठारी बने नए मेयर, कांग्रेस की सुनीता को 29 वोटों से हराया

जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील कोठारी जयपुर नगर निगम के नए महापौर (मेयर) निर्वाचित हुए हैं। शुक्रवार को हुए चुनाव में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता गुप्ता महावर को 29 वोटों के बड़े अंतर से मात दी। 40 साल के लंबे संगठनात्मक सफर में पहली बार चुनावी मैदान में उतरे कोठारी ने पहले पार्षद और अब सीधे राजधानी के मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाकर नया इतिहास रच दिया है।

चुनावी गणित: क्रॉस वोटिंग से मिली बड़ी बढ़त

जयपुर नगर निगम में बहुमत से कहीं आगे निकलते हुए भाजपा प्रत्याशी ने एकतरफा जीत दर्ज की:

  • सुनील कोठारी (BJP): 89 वोट

  • सुनीता (Congress): 60 वोट

  • NOTA: 1 वोट

निगम में भाजपा के पास 78 पार्षदों का अधिकृत संख्या बल था, जबकि कांग्रेस के 57 पार्षद थे। नतीजों में कोठारी को 89 वोट मिले, यानी भाजपा के अपने पार्षदों के अलावा 11 अतिरिक्त पार्षदों (निर्दलीय/अन्य) ने भी उनके पक्ष में क्रॉस वोटिंग की।

40 साल की तपस्या: पहली बार लड़ा चुनाव और सीधे बने मेयर

सुनील कोठारी ने 1980 के दशक में भाजपा की राजनीति में कदम रखा था।

  • पहला पद (1987): जब ओम बिरला भाजपा युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष थे, तब कोठारी को शहर कोषाध्यक्ष बनाया गया था।

  • संगठनात्मक अनुभव: वे दो बार भाजपा के प्रदेश मंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष और जयपुर शहर जिलाध्यक्ष रहे।

  • चुनावी डेब्यू: चार दशक तक संगठन के पर्दे के पीछे काम करने वाले कोठारी को पार्टी ने पहली बार 2026 के निगम चुनाव में वार्ड 112 से टिकट दिया। पार्षद बनते ही पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए सीधे मेयर का चेहरा बना दिया।

2020 का झटका और 2023 में शानदार वापसी

कोठारी के राजनीतिक सफर में कई उतार-चढ़ाव आए:

  • 7-8 महीने में छोड़ना पड़ा था पद: जनवरी 2020 में उन्हें जयपुर शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया था। गुटीय खींचतान के चलते वे अपनी कार्यकारिणी घोषित नहीं कर पाए और अगस्त 2020 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद करीब ढाई साल तक वे नेपथ्य में रहे।

  • 2023 में री-एंट्री: 2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने उन्हें प्रदेश स्तरीय चुनाव प्रबंधन समिति और आर्थिक समिति में जगह देकर मुख्यधारा में लौटाया।

‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर’ आंदोलन से बनाई पहचान

गहलोत सरकार द्वारा जयपुर को दो जिलों (जयपुर उत्तर व दक्षिण) में बांटने के फैसले के खिलाफ सुनील कोठारी ने सड़कों पर उतरकर ‘म्हारा जयपुर, प्यारा जयपुर, हमें चाहिए एक जयपुर’ जन-आंदोलन चलाया था। उन्होंने संकल्प लिया था कि यदि जयपुर का विभाजन रुका तो वे पदयात्रा निकालेंगे। सरकार बदलने के बाद यह फैसला रुका और उन्होंने 4 फरवरी 2024 को सांगानेर के सांगा बाबा मंदिर से आमेर के शिला माता मंदिर तक संकल्प पदयात्रा पूरी की।

नई चुनौतियां: राजधानी के सामने ये हैं बड़े मुद्दे

अब सुनील कोठारी के सामने शहर की सरकार चलाने की वास्तविक चुनौती होगी:

  • परकोटे और बाहरी कॉलोनियों में ट्रैफिक व पार्किंग प्रबंधन।

  • खस्ताहाल सड़कों की री-कारPETिंग और सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करना।

  • अतिक्रमण पर लगाम और सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाना।

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